#राजनीति
राजस्थान की राजनीति शुरू से ही विवादित रही हैं, यह हम सभी जानते हैं। दूसरों के नाम पर लड़ा गया चुनाव हो या जनता को धोखे में रखकर की गई पीछे की जातिवादी राजनीति..दूसरों के नाम पर चुनाव लड़कर कुर्सी हथिया लेना आम बात है, 1998 के चुनाव आपको याद ही है।
इसमें आखिर नुकसान जनता का ही है।
लेकिन जनता है कि मानती नहीं.. लेकिन राजनीति यहीं पर विश्राम नहीं लेती, यहाँ से तो शुरू होती हैं. इस सड़े सिस्टम से लड़ने का कोई प्रयास करता है तो बेमौत मारा जाता है.
कल की घटना आप सभी को मालूम ही होगी..
एक जांबाज वीर पुलिस अफसर #विष्णुदत्त_विश्नोई ने इस सड़े-गले सिस्टम से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी सिपाही ने आत्महत्या की हो..इससे पहले गेनाराम मेघवाल का नाम सुना होगा आपने।
आखिर यह आत्महत्या असल में निर्दयी हत्या है जिसको माफ नहीं किया जा सकता. यह तय है कि हत्या का कारण #राजनीति ही है. अब देखिए इन घटिया लोगों की राजनीति यहीं तक नहीं रुकती. शव पर भी राजनीति चमकाने गिद्ध की तरह आ ही पहुँचे। लेकिन फिर भी किसी न किसी सिपाही का ज़मीर जिंदा होता ही है इसी तरह वीर #रामप्रताप वहीं पर सड़े सिस्टम से भिड़ने का प्रयास करते हैं। यहाँ कुछ बहके हुए भक्त उस रामप्रताप को कोसते है कि हीरो बनने के चक्कर में बीच में बोला.. अरे मूर्खों वह दुखी था अपने साथी के मारे जाने से , उसको पता थी इस सिस्टम की सड़ी-गली परम्परा; इसलिए वो भिड़ गया उस नेता से।
वरना किसकी मज़ाल कि इन दरिन्दों के सामने कोई आँख भी उठा सके. मैं यह भी आपको बता दूँ चाहे नेता कैसा भी हो, उनकी प्रवृति एक जैसी ही होती है कुछेक को छोड़ दें तो।
फिलहाल एक नेता का वीडिओ वायरल हो रहा है जिसमें वह नेता पुलिस को धमकाता हुआ कहता है कि तुम होते कौन हो बोलने वाले.
इस प्रकार का यह पहला विडिओ तो है नहीं. आम बात हो गई है पुलिस या ईमानदार अफसर को धमकाना।
अब जवाब तो जनता ही दे सकती है. लेकिन हम तो जागेंगे नहीं, जब तक ऐसे अनेक विष्णुदत्त मारे जाएंगे।
कुछ न्यूज़ पेपर्स के अनुसार पता चलता है कि विष्णुदत्त जी ने दो सुसाइड नोट लिखे थे, जिसमें एक अपने घरवालों को; दूसरा एसपी को।
एक चेट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है (कितनी सच्चाई है पता नहीं) जिसमें किसी विधायिका के दबाव में आने की बात की गई है।
मेरे कहने का अर्थ है कि इसके पीछे कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है सारा सड़ा-गला सिस्टम जिम्मेदार है ।
जब तक यह सिस्टम नहीं सुधरेगा तब तक अनेक विष्णु मारे जाएँगे बेमौत।
हम-तुम यह भूल जाएँगे अगले चुनावों में. इन्हीं नेताओं को पहनाएंगे फूलों की माला, जिन्होंने हमसे एक नहीं हज़ारों विष्णु छीने हैं।
जितना नुकसान या भय हमें उस तथाकथित दूसरे देशों का बताकर डराते हैं उनसे कहीं गुना ज्यादा इन अपने ही सपोलों से है जो कुर्सी पर बैठकर आराम की नींद सो रहे हैं या किसी तथाकथित दीदीयों के साथ बैठकर सैर करते हुए देखे जा सकते हैं।
आख़िर कब तक हम अपनों को श्रद्धांजलि देते रहेंगे. किस-किस को।
अंदर सिस्टम से लड़ रहे उनको या सीमा पर लड़ रहे उनको..
आखिर दोनों ही अपने तो कुछ लगते नहीं, हम क्यों आवाज़ उठाएँ। हम तो सोते रहेंगे, मैं भी सोता रहूँगा। पहला गेनाराम दूसरा विष्णु तीसरा राम......😢
#गुस्ताखी_मुआफ़
गजेंद्र जाखड़
24 मई,2020
राजस्थान की राजनीति शुरू से ही विवादित रही हैं, यह हम सभी जानते हैं। दूसरों के नाम पर लड़ा गया चुनाव हो या जनता को धोखे में रखकर की गई पीछे की जातिवादी राजनीति..दूसरों के नाम पर चुनाव लड़कर कुर्सी हथिया लेना आम बात है, 1998 के चुनाव आपको याद ही है।
इसमें आखिर नुकसान जनता का ही है।
लेकिन जनता है कि मानती नहीं.. लेकिन राजनीति यहीं पर विश्राम नहीं लेती, यहाँ से तो शुरू होती हैं. इस सड़े सिस्टम से लड़ने का कोई प्रयास करता है तो बेमौत मारा जाता है.
कल की घटना आप सभी को मालूम ही होगी..
एक जांबाज वीर पुलिस अफसर #विष्णुदत्त_विश्नोई ने इस सड़े-गले सिस्टम से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी सिपाही ने आत्महत्या की हो..इससे पहले गेनाराम मेघवाल का नाम सुना होगा आपने।
आखिर यह आत्महत्या असल में निर्दयी हत्या है जिसको माफ नहीं किया जा सकता. यह तय है कि हत्या का कारण #राजनीति ही है. अब देखिए इन घटिया लोगों की राजनीति यहीं तक नहीं रुकती. शव पर भी राजनीति चमकाने गिद्ध की तरह आ ही पहुँचे। लेकिन फिर भी किसी न किसी सिपाही का ज़मीर जिंदा होता ही है इसी तरह वीर #रामप्रताप वहीं पर सड़े सिस्टम से भिड़ने का प्रयास करते हैं। यहाँ कुछ बहके हुए भक्त उस रामप्रताप को कोसते है कि हीरो बनने के चक्कर में बीच में बोला.. अरे मूर्खों वह दुखी था अपने साथी के मारे जाने से , उसको पता थी इस सिस्टम की सड़ी-गली परम्परा; इसलिए वो भिड़ गया उस नेता से।
वरना किसकी मज़ाल कि इन दरिन्दों के सामने कोई आँख भी उठा सके. मैं यह भी आपको बता दूँ चाहे नेता कैसा भी हो, उनकी प्रवृति एक जैसी ही होती है कुछेक को छोड़ दें तो।
फिलहाल एक नेता का वीडिओ वायरल हो रहा है जिसमें वह नेता पुलिस को धमकाता हुआ कहता है कि तुम होते कौन हो बोलने वाले.
इस प्रकार का यह पहला विडिओ तो है नहीं. आम बात हो गई है पुलिस या ईमानदार अफसर को धमकाना।
अब जवाब तो जनता ही दे सकती है. लेकिन हम तो जागेंगे नहीं, जब तक ऐसे अनेक विष्णुदत्त मारे जाएंगे।
कुछ न्यूज़ पेपर्स के अनुसार पता चलता है कि विष्णुदत्त जी ने दो सुसाइड नोट लिखे थे, जिसमें एक अपने घरवालों को; दूसरा एसपी को।
एक चेट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है (कितनी सच्चाई है पता नहीं) जिसमें किसी विधायिका के दबाव में आने की बात की गई है।
मेरे कहने का अर्थ है कि इसके पीछे कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है सारा सड़ा-गला सिस्टम जिम्मेदार है ।
जब तक यह सिस्टम नहीं सुधरेगा तब तक अनेक विष्णु मारे जाएँगे बेमौत।
हम-तुम यह भूल जाएँगे अगले चुनावों में. इन्हीं नेताओं को पहनाएंगे फूलों की माला, जिन्होंने हमसे एक नहीं हज़ारों विष्णु छीने हैं।
जितना नुकसान या भय हमें उस तथाकथित दूसरे देशों का बताकर डराते हैं उनसे कहीं गुना ज्यादा इन अपने ही सपोलों से है जो कुर्सी पर बैठकर आराम की नींद सो रहे हैं या किसी तथाकथित दीदीयों के साथ बैठकर सैर करते हुए देखे जा सकते हैं।
आख़िर कब तक हम अपनों को श्रद्धांजलि देते रहेंगे. किस-किस को।
अंदर सिस्टम से लड़ रहे उनको या सीमा पर लड़ रहे उनको..
आखिर दोनों ही अपने तो कुछ लगते नहीं, हम क्यों आवाज़ उठाएँ। हम तो सोते रहेंगे, मैं भी सोता रहूँगा। पहला गेनाराम दूसरा विष्णु तीसरा राम......😢
#गुस्ताखी_मुआफ़
गजेंद्र जाखड़
24 मई,2020
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